
AI आज ऐसा टॉपिक है, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता। पिंकसिटी नेशनल लिट्रेचर ड्रामा फेस्टिवल 2025 में एक सत्र पूरा AI को समर्पित रहा।
दिल्ली ले आए प्रत्यूष रंजन, जो कि पीटीआई न्यूज एजेंसी में डिजिटल हेड हैं, ने AI पर विस्तार से चर्चा की। प्रत्यूष AI और फैक्ट चैकिंग पर भारतीय मीडिया के वो प्रतिनिधि हैं जो विदेशों में लगातार इस मुद्दे पर अध्ययन और अध्यापन करते रहे हैं। प्रत्यूष रंजन ने ‘AI और पत्रकारिता : कहानी कहने का नया दौर’ सत्र में कहा कि आप एआई का मजे मजे में इस्तेमाल तो कर रहे हैं, पर जरा संभल कर। सोर्स जरूर जांचे, एआई आपको कहां से जानकारी दे रहा है। प्रत्यूष के मुताबिक ये बहुत पावरफुल टूल है.. बस इसके आगे खुद टूल न बन जाएं। प्रत्यूष ने सत्र में 5 W 1H की न्यूज मेकिंग थ्योरी में अपना AI फंडा 1 B और 1E भी समाहित करते हुए इसके बारे में बताया।
इस सत्र में टीवी जर्नलिस्ट विशाल सूर्यकांत ने AI और मानव जनित शायरी का लाइव डेमो दिया। विशाल टीवी की दुनिया के जाने माने हस्ताक्षर हैं। विशाल सूर्यकांत इन दिनों राजस्थान में पंजाब केसरी समूह के टीवी प्रभाग का नेतृत्व करते हैं। पॉलेटिकल रिपोर्टिंग से लेकर संपादक के सफर में वे कई संस्थानों के टीवी लॉन्च कराने का जिम्मा रखते हैं। विशाल ने एआई के भय से किनारे किनारे न चल कर समंदर के बीच में कश्ती ले जाने की सलाह दी।
सत्र में डिजिटल जर्नलिस्ट अमित शर्मा ने बताया कि आज वीडियो इंडस्ट्री में किस तरह से एआई क्रांति कर चुका है। एंकर के अवतार, वॉइस ओवर में क्लोनिंग हो चुकी है। अब तक वॉइस ओवर में डॉलर्स कमाने वाले वीओ आर्टिस्ट अब एआई के सामने बेबस होते नजर आ रहे हैं। इसलिए इस तकनीक से भागें नहीं, सीखें और खुद इस्तेमाल करें। अपने प्रोफेशन को एनरिच करें।
एड इंडस्ट्री से जुड़े संजय छाबड़ा का अनुभव कंटेंट इंडस्ट्री और फ्रीलांसर्स के लिए सचेत करने वाला है। वो बताते हैं पहले उनके पास कंटेंट राइटर की एक फौज हुआ करती थी। अब टीम में 18-19 साल के बच्चे हैं। जो एक प्रोम्पट पर जिंगल, एड से लेकर फिल्म तक की स्क्रिप्ट सैकेंडों में लिखवा देते हैं। उसमें कुछ फेरबदल के बाद वो इतनी दुरुस्त होती है, कि काम चल जाता है।
गौरतलब है कि पीपुल्स मीडिया एंड थिएटर और साहित्य अकादमी उदयपुर की ओर से जयपुर के पिंकसिटी प्रेस क्लब में तीन दिन का लिट्रेचर फेस्ट हुआ। जिसमें साहित्य, नाटक, पत्रकारिता पर करीब बीस सत्र हुए। ओपनमाइक खुल्लमखुला चर्चित रहा। मुशायरा, संगीत भरी शाम, नाटक अजब चोर की गजब कहानी भी हुआ। एपेक्स यूनिवर्सिटी के बच्चों की ओर से झंकार बैंड की प्रस्तुति में फिल्मी गीतों के तराने गाए गए।