कहीं आपको कोई पत्रकार ब्लैकमेल तो नहीं कर रहा ?

– अमित शर्मा-

जयपुर की मुरलीपुरा थाना पुलिस ने ब्लैकमेलिंग के आरोप में पत्रकार और उसके साथियों को गिरफ्तार किया है. खबर का स्क्रीनशॉट यहां अटैच है. हालांकि इस मोहित नाम के कथित पत्रकार को देख मुझे याद नहीं पड़ता कि मैंने इसे जयपुर के किसी अखबार या चैनल या वैब में पत्रकारिता करते देखा है.
पत्रकारिता के नाम पर ठगी का धंधा नया नहीं है. फर्क ये है कि पहले कुछ कथित पत्रकार ये ब्लैकमेलिंग करते आ रहे थे, अब ठगों ने पत्रकारिता के नाम की आड़ ले ली है. तीन या चार महीने में कहीं न कहीं से मेरे किसी जानकार का फोन आ ही जाता है कि हम मकान बना रहे हैं या दुकान बढ़ा रहे हैं, वहां एक कैमरा लेकर पत्रकार महोदय आए और 50 हजार मांग गए. कई जगह मेरे जानकार होने की बात सुनकर दोबारा न आए तो कई जगह पीड़ित पक्ष ने दस पन्द्रह हजार देकर पिंड छुड़ाया. मैंने इस करप्शन पर नाराजगी जताई तो जवाब आया कि हम भी इल्लीगल कंस्ट्रक्शन कर रहे हैं, इसलिए दे दिए. अब ऐसे में क्या कहिए..
बहरहाल, आज ये ब्लॉग लिखने की जरूरत इसलिए पड़ी कि आप सतर्क रहिए. अगर कोई ठग पत्रकारिता कर रहा है, या कोई पत्रकार ठगी कर रहा है, समाज के लिए इससे शर्मनाक कुछ भी नहीं. उसे कुछ पैसे थमा कर इतिश्री न कीजिए. पुलिस को शिकायत कीजिए. बस 100 नंबर डायल करने होते हैं. ये मत सोचिए कि कौन पड़ेगा पचड़े में.
हालांकि मुरलीपुरा टाइप केस में तो प्रोपर ब्लैकमेलिंग है, मेरा तो ये मानना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त वाऊचर, गिफ्ट, कैश कार्ड भी एक तरह का करप्शन ही है. ये बिल्कुल बंद होना चाहिए. संजीदा पत्रकार दशकों से मिसाल देते आ रहे हैं, वो गिफ्ट नहीं लेते. खैर.. ये मैं टॉपिक से डिरेल हो गया.. फिर मुद्दे पर लौटते हैं.
पत्रकार संगठनों और प्रेस क्लब्स को इसके लिए एक स्पेशल सैल बनानी चाहिए. सूचना एंव जनसंपर्क विभाग की ओर से भी एक हेल्पलाइन नंबर हो सकती है. बल्कि अखबारों को भी कहीं एक जगह ये प्रचारित करना चाहिए, कि हमारा कोई पत्रकार आप से कुछ मांग रहा है तो इस नंबर पर फोन करें. या अखबार के नाम की आड़ पर कोई ठग ब्लैकमेलिंग कर रहा है तो इस नंबर या ईमेल पर सूचित करें…
100 में से 1 केस ही सामने आ पाता है. 99 केस में ये पत्रकार नुमा ठग या ठग नुमा पत्रकार मोटी रकम वसूल पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं. इनसे सावधान रहिए और इन्हें रोकिए. एक विनम्र अपील.


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